आज के समय में खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाजार से महंगे बीज, रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशक खरीदने में ही किसान की आधी कमाई निकल जाती है। ऐसे में जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग (ZBNF) यानी ‘शून्य बजट प्राकृतिक खेती’ एक ऐसी उम्मीद की किरण है, जो किसान को कर्ज मुक्त और समृद्ध बना सकती है।
khetkisan.com के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे आप बिना एक रुपया खर्च किए, घर पर ही खाद और कीटनाशक बनाकर बम्पर पैदावार ले सकते हैं।
जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग (ZBNF) क्या है?
ZBNF का अर्थ है ऐसी खेती जिसमें किसान को बाहर से कुछ भी खरीदने की आवश्यकता न पड़े। इस तकनीक के जनक पद्मश्री सुभाष पालेकर जी हैं। उनका मानना है कि पौधों को बढ़ने के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व मिट्टी में पहले से मौजूद होते हैं। हमें बस उन पोषक तत्वों को सक्रिय करने के लिए ‘प्राकृतिक उत्प्रेरक’ (Natural Catalysts) की जरूरत होती है।
इसमें मुख्य रूप से देसी गाय के गोबर और गौमूत्र का उपयोग किया जाता है। एक देसी गाय की मदद से आप 30 एकड़ तक की खेती आसानी से कर सकते हैं।
ZBNF के चार मुख्य स्तंभ (The 4 Pillars)
ZBNF तकनीक मुख्य रूप से इन चार सिद्धांतों पर टिकी है:
- जीवामृत (Jivamrita): यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने वाला एक जादुई घोल है।
- बीजामृत (Bijamrita): बीजों को उपचारित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है ताकि फसल को शुरू से ही रोगों से बचाया जा सके।
- आच्छादन (Mulching): मिट्टी को फसल के अवशेषों या पत्तों से ढंकना, ताकि नमी बनी रहे और सूक्ष्मजीव सक्रिय रहें।
- वाप्सा (Waaphasa): मिट्टी में हवा और पानी के सही संतुलन को बनाए रखना।
जीवामृत बनाने की विधि (Step-by-Step Guide)
जीवामृत इस खेती की जान है। इसे घर पर बनाना बेहद आसान और सस्ता है।
जरूरी सामग्री (200 लीटर घोल के लिए):
- देसी गाय का ताजा गोबर: 10 किलो
- देसी गाय का पुराना गौमूत्र: 5 से 10 लीटर
- गुड़ (पुराना): 1 से 2 किलो
- बेसन (किसी भी दाल का आटा): 2 किलो
- सजीव मिट्टी (खेत की मेड़ या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी): एक मुट्ठी
- पानी: 200 लीटर
बनाने की प्रक्रिया:
- एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम में 200 लीटर पानी भरें।
- इसमें गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी डालकर अच्छी तरह मिला दें।
- इस मिश्रण को छाया में रखें और जूट की बोरी से ढंक दें।
- अगले 2 से 3 दिनों तक सुबह-शाम इस घोल को लकड़ी के डंडे से घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में घुमाएं।
- 4 से 7 दिनों में आपका जीवामृत तैयार हो जाएगा।
उपयोग कैसे करें?: सिंचाई के पानी के साथ इसे खेत में छोड़ें या छानकर फसलों पर छिड़काव करें।
घर पर कीटनाशक (नीमास्त्र) बनाने की विधि
बाजार के महंगे कीटनाशकों की जगह आप नीमास्त्र का प्रयोग कर सकते हैं:
- सामग्री: 100 लीटर पानी, 5 लीटर गौमूत्र, 2 किलो गोबर और 10 किलो नीम की पत्तियों की चटनी।
- विधि: इन सबको मिलाकर 48 घंटे के लिए छोड़ दें। छानकर सीधा छिड़काव करें। यह सभी प्रकार के रस चूसने वाले कीटों और इल्लियों के लिए रामबाण है।
लागत शून्य और मुनाफा डबल कैसे?
- बाजार पर निर्भरता खत्म: खाद, बीज और दवाई का पैसा पूरी तरह बच जाता है।
- बेहतर गुणवत्ता: प्राकृतिक रूप से उगी फसल का स्वाद और पोषण अधिक होता है, जिससे बाजार में इसके ऊंचे दाम मिलते हैं।
- कम पानी की जरूरत: आच्छादन (Mulching) के कारण मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे 50% से 60% कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q.1: क्या इसके लिए सिर्फ देसी गाय का ही गोबर चाहिए?
उत्तर: हाँ, ZBNF में देसी गाय के गोबर और गौमूत्र को सबसे प्रभावी माना गया है क्योंकि इसमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बहुत अधिक होती है।
Q.2: क्या जीवामृत के इस्तेमाल से पैदावार तुरंत बढ़ जाती है?
उत्तर: रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर आने पर मिट्टी को सुधरने में थोड़ा समय लगता है। शुरुआत में पैदावार स्थिर रह सकती है, लेकिन 1-2 साल बाद यह बढ़ जाती है।
Q.3: गुड़ और बेसन क्यों डाला जाता है?
उत्तर: गुड़ सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का काम करता है और बेसन उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे उनकी संख्या करोड़ों में बढ़ जाती है।
Q.4: जीवामृत को कितने दिनों तक स्टोर किया जा सकता है?
उत्तर: इसे बनाने के 7 से 10 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लेना सबसे अच्छा रहता है।
Q.5: क्या ZBNF से बड़ी फसलों (जैसे फलदार पेड़) की खेती हो सकती है?
उत्तर: बिल्कुल, यह तकनीक अनाज, सब्जी, और बागवानी (फलों) सभी के लिए अत्यंत प्रभावी है।
Q.6: बीजामृत से बीजों को उपचारित करना क्यों जरूरी है?
उत्तर: यह बीजों को मिट्टी से होने वाली फफूंद और रोगों से बचाता है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है।
Q.7: क्या इसमें यूरिया या DAP का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करना?
उत्तर: ZBNF का सिद्धांत ही रसायनों को पूरी तरह त्यागना है। धीरे-धीरे रसायनों को कम करें और फिर बंद कर दें।
Q.8: मल्चिंग (आच्छादन) के लिए क्या इस्तेमाल करें?
उत्तर: पिछली फसल के अवशेष, सुखी घास, या पेड़ों के सूखे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Q.9: शहरी लोग इसे कैसे अपना सकते हैं?
उत्तर: आप गमलों और किचन गार्डन में भी छोटी मात्रा में जीवामृत बनाकर इसका लाभ उठा सकते हैं।
महत्वपूर्ण सावधानियाँ (Important Precautions)
- धूप से बचाव: जीवामृत के ड्रम को हमेशा छांव में रखें, क्योंकि सीधी धूप सूक्ष्मजीवों को मार सकती है।
- घुमाने का तरीका: घोल को हमेशा एक ही दिशा में घुमाएं ताकि सूक्ष्मजीवों की ऊर्जा बनी रहे।
- मिट्टी की सेहत: रसायनों का उपयोग तुरंत बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम करें ताकि मिट्टी का संतुलन न बिगड़े।
Disclaimer: khetkisan.com पर दी गई यह जानकारी प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों पर आधारित है। ZBNF के परिणाम आपकी मिट्टी की वर्तमान स्थिति, जलवायु और आपके द्वारा किए गए प्रबंधन पर निर्भर करते हैं। किसी भी बड़े बदलाव से पहले छोटे क्षेत्र में प्रयोग करें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें। किसी भी प्रकार की फसल हानि या अन्य समस्या के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।
