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  • अब फसल खराब होने पर चिंतामुक्त रहे: ये राज्य सरकार किसानों को देगी ₹11,000 करोड़ से ज्यादा का सुरक्षा कवच, कैबिनेट का बड़ा फैसला

    अब फसल खराब होने पर चिंतामुक्त रहे: ये राज्य सरकार किसानों को देगी ₹11,000 करोड़ से ज्यादा का सुरक्षा कवच, कैबिनेट का बड़ा फैसला

    हमेशा से किसानो को यही डर रहता है की मौसम के बदलते मिजाज, बेमौसम बारिश, सूखा और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी फसल बर्बाद न हो जाए इस लिए खेती किसानों के लिए एक रिस्क बन चुकी है। लेकिन अब मध्य प्रदेश के किसानों को फसल बर्बादी के आर्थिक नुकसान की चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। राज्य की मोहन यादव सरकार ने किसानों को एक ऐतिहासिक और बेहद मजबूत सुरक्षा कवच देने का ऐलान किया है।

    मध्य प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana) को राज्य में अगले 5 सालों के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए कैबिनेट ने ₹11,608.47 करोड़ का एक भारी-भरकम बजट पास किया है। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य के लाखों किसानों को खेती में आने वाले जोखिमों से बड़ी राहत मिलेगी। khetkisan.com के इस विशेष लेख में हम जानेंगे इस योजना की पूरी डिटेल और किसानों को मिलने वाले फायदों के बारे में।

    Fasal Bima
    Fasal Bima

    पूरे 5 साल तक जारी रहेगा यह सुरक्षा चक्र

    मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में लिए गए इस फैसले के मुताबिक, फसल बीमा योजना का यह सुरक्षा चक्र साल 2026-27 से लेकर वर्ष 2030-31 तक यानी पूरे 5 सालों के लिए प्रभावी रहेगा।

    • बजट का प्रावधान: सरकार ने 11000 करोड़ से ज्यादा राशि पहले ही सुरक्षित रखी है ताकि किसानों की फसल खराब होने पर उनके बीमा क्लेम में देरी न हो। 
    • आर्थिक मजबूती: मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले से राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को एक बड़ी आर्थिक सहायता मिलेगी।

    80 फीसदी नुकसान की भरपाई की गारंटी

    किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने क्लेम सेटलमेंट को लेकर भी बेहद पारदर्शी नियम तय किए हैं:

    • इंडेमनिटी लेवल: सरकार ने सभी फसलों के लिए ‘इंडेमनिटी लेवल’ यानी नुकसान की भरपाई का स्तर 80 प्रतिशत तय किया है, जो आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।
    • पारदर्शी मॉडल: इस योजना को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार दो अलग-अलग मॉडल्स पर काम कर रही है, जिससे बीमा कंपनियों और सरकार के बीच क्लेम की राशि का बंटवारा पूरी तरह पारदर्शी और सटीक तरीके से हो सके।

    सैटेलाइट और आधुनिक टेक्नोलॉजी से होगा नुकसान का सटीक आकलन

    अक्सर किसानों को शिकायत रहती है कि पटवारी या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि उनके नुकसान का सही आकलन नहीं करते। इस समस्या को खत्म करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार अब हाई-टेक टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है:

    • इसरो (ISRO) की मदद: फसलों के नुकसान का एकदम सटीक अंदाजा लगाने के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी और एडवांस मौसम डेटा सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
    • इसके लिए इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) जैसी देश की सबसे बड़ी संस्थाओं की तकनीकी मदद ली जा रही है, जिससे किसी भी मानवीय दखल या पक्षपात के बिना किसानों को उनके नुकसान का सही मुआवजा मिल सके।

    बेहद मामूली प्रीमियम, बाकी पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    इस योजना के तहत किसानों को अपनी फसलों का बीमा कराने के लिए अपनी जेब से बहुत नाममात्र का प्रीमियम देना होता है:

    फसल का प्रकार (Crop Type)किसान द्वारा देय प्रीमियम (Premium Rate)
    खरीफ फसलें (जैसे- धान, मक्का, बाजरा, कपास आदि)2 प्रतिशत
    रबी फसलें (जैसे- गेहूं, सरसों, चना आदि)1.5 प्रतिशत
    कमर्शियल व बागवानी फसलें (वाणिज्यिक या फल-सब्जियां)5 प्रतिशत

    किसान के हिस्से के इस मामूली प्रीमियम के बाद बची हुई पूरी भारी-भरकम राशि का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आधा-आधा वहन करती हैं। इससे गरीब और छोटे किसानों पर कोई वित्तीय दबाव नहीं आता और उनकी फसल को पूरी सुरक्षा मिल जाती है।

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    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

    Q.1: मध्य प्रदेश सरकार ने फसल बीमा योजना के लिए कितना बजट मंजूर किया है?

    उत्तर: सरकार ने अगले 5 वर्षों (2026-27 से 2030-31) के लिए कुल ₹11,608.47 करोड़ का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है।

    Q.2: फसल खराब होने पर बीमे की सूचना कहाँ और कितने समय में देनी होती है?

    उत्तर: किसी भी प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर आपको इसकी सूचना फसल बीमा ऐप (Crop Insurance App), अपने संबंधित बैंक, कृषि अधिकारी या टोल-फ्री नंबर पर देनी अनिवार्य है।

    Q.3: बागवानी या नगदी फसलों के लिए किसानों को कितना प्रीमियम देना होता है?

    उत्तर: कपास, गन्ना, फल और सब्जियों जैसी कमर्शियल या बागवानी फसलों के लिए किसानों को केवल 5% प्रीमियम देना होता है।

    Q.4: फसल बीमा का पैसा सीधे कहाँ ट्रांसफर किया जाता है?

    उत्तर: सैटेलाइट और तकनीकी सर्वे के बाद स्वीकृत क्लेम की राशि सीधे किसान के उस बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे उनका केसीसी (KCC) या भूमि खाता लिंक होता है।

    Q.5: क्या बटाई पर खेती करने वाले किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं?

    उत्तर: हाँ, गैर-ऋणी और बटाईदार किसान भी भू-स्वामी के साथ हुए समझौते के वैध दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र जमा करके अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं।

    Q.6: नुकसान के आकलन के लिए इसरो (ISRO) की तकनीक से किसानों को क्या फायदा होगा?

    उत्तर: सैटेलाइट तकनीक से यह पता चल जाता है कि किस क्षेत्र में कितनी फसल खराब हुई है। इससे क्लेम पास होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

    Q.7: क्या इस योजना का लाभ लेने के लिए केसीसी (KCC) होना जरूरी है?

    उत्तर: नहीं, जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) नहीं है, वे भी अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या बैंक शाखा में जाकर अपनी फसलों का स्वैच्छिक बीमा करा सकते हैं।

    Q.8: यदि बुवाई के तुरंत बाद सूखा या बाढ़ आ जाए और फसल न उगे, तो क्या क्लेम मिलता है?

    उत्तर: हाँ, इस योजना में ‘रोक दी गई बुवाई’ (Prevented Sowing) का भी प्रावधान है। यदि मौसम के कारण किसान बुवाई नहीं कर पाता या शुरुआती चरण में ही फसल नष्ट हो जाती है, तो भी शर्तों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।

    Q.9: मध्य प्रदेश के अलावा क्या अन्य राज्यों के किसान भी इसका लाभ ले सकते हैं?

    उत्तर: यह विशेष बजटीय घोषणा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अपने राज्य के किसानों के लिए की गई है, हालांकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देश के अन्य राज्यों में भी वहां की सरकारों के नियमों के अनुसार लागू है।

    Disclaimer: khetkisan.com पर दी गई यह जानकारी केवल किसानों की सामान्य जागरूकता और समाचार माध्यमों पर आधारित है। फसल बीमा के नियम, क्लेम की शर्तें और प्रीमियम की दरें समय-समय पर सरकार और बीमा कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार बदली जा सकती हैं। किसी भी फसल का बीमा कराने या क्लेम का दावा करने से पहले मध्य प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल या अपने नजदीकी कृषि विस्तार अधिकारी से नियमों की लाइव पुष्टि जरूर कर लें। किसी भी तकनीकी त्रुटि या क्लेम अस्वीकृति के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।