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  • कीवी की खेती (Kiwi Farming): ठंडे इलाकों का ‘सुपरफ्रूट’ अब मैदानी क्षेत्रों में भी, एक एकड़ से सालाना ₹10 लाख तक की कमाई

    कीवी की खेती (Kiwi Farming): ठंडे इलाकों का ‘सुपरफ्रूट’ अब मैदानी क्षेत्रों में भी, एक एकड़ से सालाना ₹10 लाख तक की कमाई

    खेती की दुनिया में अगर किसी फल ने हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है, तो वह है कीवी (Kiwi)। इसे सुपरफ्रूट भी कहा जाता हैं। क्योंकि यह विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है। पहले माना जाता था कि कीवी केवल ठंडे और पहाड़ी इलाकों में ही उगाई जा सकती है, लेकिन नई किस्मों और आधुनिक तकनीक की वजह से अब मैदानी क्षेत्रों के किसान भी इसकी खेती करके लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।

    khetkisan.com के इस लेख में हम जानेंगे कीवी की खेती की पूरी प्रक्रिया, मैदानी इलाकों के लिए उन्नत किस्में और इससे होने वाली कमाई का पूरा गणित।

    कीवी की खेती ही क्यों चुनें?

    • भारी बाजार मांग: डेंगू जैसी बीमारियों में इसे प्लेट्सलेट्स बढ़ाने के लिए लाभदायक माना जाता है। इस लिए इसकी बाजार में अधिक माँग हैं। 
    • लंबी आयु: कीवी का पौधा एक बार लगाने के बाद 40 से 50 सालों तक फल देता है। 
    • कम प्रतिस्पर्धा: भारत में कीवी का उत्पादन कम होने के कारण किसानों को इसके अच्छे दाम मिलते है। 
    • मैदानी क्षेत्रों में संभावनाएं: ग्राफ्टिंग और तापमान सहने वाली नई किस्मों ने इसे गर्म इलाकों के लिए भी सुलभ बना दिया है।

    मिट्टी और जलवायु (Climate & Soil)

    • जलवायु: कीवी के लिए 15°C से 30°C का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। अधिक गर्मी वाले मैदानी इलाकों में इसे ‘शेड नेट’ के अंदर उगाया जा सकता है।
    • मिट्टी: हल्की दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, कीवी के लिए सर्वोत्तम है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए。

    उन्नत किस्में (Improved Varieties)

    मैदानी और कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ कुछ खास किस्मों की सलाह देते हैं:

    • एलिसन (Allison): यह किस्म मैदानी इलाकों में अच्छा उत्पादन देती है।
    • हेवर्ड (Hayward): इसकी भंडारण क्षमता बहुत अच्छी होती है और फल बड़े आकार के होते हैं।
    • एबॉट (Abbott): यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म है।

    खेती की तकनीक: ट्रेलिस सिस्टम (Trellis System)

    कीवी एक बेल वाला पौधा है, इसलिए इसे सहारे की जरूरत होती है।

    1. टी-बार (T-Bar): लोहे या कंक्रीट के खंभों पर तार बांधकर ‘T’ आकार का ढांचा बनाया जाता है।
    2. दूरी: कतार से कतार की दूरी 4 मीटर और पौधों के बीच की दूरी 5 मीटर रखनी चाहिए।
    3. नर और मादा का अनुपात: कीवी में परागण के लिए 8 मादा पौधों के बीच 1 नर पौधा लगाना अनिवार्य है।

    लागत और कमाई का गणित

    • लागत: एक एकड़ में पोल, तार, ड्रिप सिस्टम और पौधों को मिलाकर शुरुआती खर्च ₹4 लाख से ₹5 लाख तक आ सकता है।
    • पैदावार: कीवी का पौधा 4-5 साल में फल देना शुरू करता है। एक एकड़ से औसतन 80 से 100 क्विंटल पैदावार मिल सकती है।
    • कमाई: बाजार में कीवी औसतन ₹100 से ₹150 प्रति किलो बिकती है। इस हिसाब से एक एकड़ से सालाना ₹10 लाख से ₹15 लाख तक की आय संभव है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    Q.1: क्या कीवी को राजस्थान या हरियाणा जैसे गर्म राज्यों में उगाया जा सकता है?

    उत्तर: हाँ, लेकिन इसके लिए ‘शेड नेट’ तकनीक और तापमान को नियंत्रित करने वाले उपायों की आवश्यकता होती है।

    Q.2: एक एकड़ में कितने पौधे लगते हैं?

    उत्तर: विधि और दूरी के अनुसार एक एकड़ में लगभग 200 से 250 पौधे लगाए जा सकते हैं।

    Q.3: कीवी के पौधे कहाँ से खरीदें?

    उत्तर: हमेशा सरकारी नर्सरी या मान्यता प्राप्त टिश्यू कल्चर लैब से ही पौधे लें।

    Q.4: कीवी के फल कब पकते हैं?

    उत्तर: भारत में इसकी कटाई अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जाती है।

    Q.5: क्या इसके लिए सरकार सब्सिडी देती है?

    उत्तर: हाँ, राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत विभिन्न राज्यों में 40% से 50% तक सब्सिडी दी जाती है।

    Q.6: कीवी की सिंचाई कैसे करें?

    उत्तर: ड्रिप इरिगेशन सबसे अच्छा है क्योंकि इसे लगातार हल्की नमी की जरूरत होती है।

    Q.7: क्या फल लगने के बाद विशेष देखभाल चाहिए?

    उत्तर: फलों के अच्छे आकार के लिए ‘थिनिंग’ (अतिरिक्त फलों को हटाना) जरूरी है।

    Q.8: कीवी की शेल्फ लाइफ कितनी होती है?

    उत्तर: इसे कोल्ड स्टोरेज में 4 से 6 महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    Q.9: कीवी में कौन सी बीमारियां लगती हैं?

    उत्तर: इसमें बीमारियां कम लगती हैं, लेकिन ‘रूट रॉट’ (जड़ सड़न) से बचाव के लिए जलभराव न होने दें।

    महत्वपूर्ण सावधानियाँ (Important Precautions)

    1. परागण का ध्यान: यदि नर पौधों की संख्या कम हुई, तो फल नहीं लगेंगे या बहुत छोटे रह जाएंगे।
    2. पानी का प्रबंधन: पौधों की जड़ों में पानी खड़ा न होने दें, इससे पौधा सूख सकता है।
    3. छाया का प्रबंध: मैदानी इलाकों में दोपहर की तेज धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट का उपयोग करें।

    Disclaimer: khetkisan.com पर दी गई यह जानकारी किसानों के मार्गदर्शन के लिए है। कीवी की खेती एक उच्च-तकनीकी और लंबी अवधि का निवेश है। किसी भी क्षेत्र में खेती शुरू करने से पहले अपनी मिट्टी की जाँच कराएं और स्थानीय कृषि विभाग या सफल कीवी किसानों से प्रशिक्षण जरूर लें। किसी भी वित्तीय हानि के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।