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  • Golden Tips for Seasonal Farming: आइए देखते है हर मौसम में कैसे पाए अच्छी पैदावार 

    Golden Tips for Seasonal Farming: आइए देखते है हर मौसम में कैसे पाए अच्छी पैदावार 

    हमारे भारत देश में मौसमी खेती होती है। जिसका अर्थ यह है की भारत देश में हर मौसम की अलग – अलग खेती की जाती है। क्योकि कृषि करने में मौसम का बहुत ही बड़ा योगदान होता है। हर एक किसान यह चाहता है की जो वो कृषि कर रहा है उस में उसको अच्छी पैदावार मिले। लेकिन अच्छी पैदावार के लिए मौसम के हिसाब से कृषि करना भी बहुत जरुरी होता है। जैसे हमारे भारत देश में तीन प्रकार की खेती की जाती है। जिनके नाम ये है खरीफ फसल, रबी की फसल और जायद। ये तीनो अलग – अलग मौसमो की फसल है। तो आइए हम देखते है की ये फसल कब और किस तरह की जाती है। सबसे  पहले हम खरीफ की फसल देखते है। 

    खरीफ फसल 

    खरीफ की फसल की खेती मानसून में की जाती है। यह खेती जून से अक्टूबर तक के महीनो में की जाती है। खरीफ की फसले मानसून की वर्षा पर निर्भर होती है। अगर वर्षा अच्छी होगी तो हमारी फसल भी अच्छी होगी। ये फसले मासून के आगमन के साथ बोई जाती है। 

    खरीफ की फसले 

    • धान (चावल)
    • मक्का
    • बाजरा 
    • ज्वार 
    • सोयाबीन 
    • मूँगफली  
    • कपास 

    खरीफ की फसलों की खेती करने का तरीका 

    खरीफ की फसलों की खेती करते हुए इन बातो का ध्यान रखना बहुत जरुरी है ताकि हमारी फसल अच्छी हो और अधिक पैदावार दे। 

    • मिट्टी की तैयारी : किसी भी फसल की खेती करने से पहले सबसे जरूरी होता है मिटटी को तैयार करना। गर्मियों में मिट्टी की गहरी जुताई करे ताकि मिट्टी के अंदर हवा का संचार हो और हानिकारक कीड़े मर जाये। 
    • फसल का चुनाव : फिर हमे फसल का चुनाव करना चाहिए की हमको कौन – सी  फसल लगानी है। धान, मक्का, मूंग, कपास आदि फसलों का चुनाव करे। 
    • बीज उपचार : खेती शुरू करने से पहले बीज उपचार करना चाहिए ताकि बीजो को फफूंद, कीड़ो, और मिटटी से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके। 
    • जल निकासी : अत्यधिक वर्षा के कारण जल निकासी न होने दे क्योकि इसकी वजह से फसल सड़ सकती है। यह समस्या अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में हो सकती है। 
    • खरपतवार प्रबंधन : खरपतवार प्रबंधन का अर्थ है जो हमारी फसलों को के साथ अनचाहे पौधा उगते है उनको हटाया जाये। क्योकि ये हमारी फसलों को पूरा पोषण नहीं मिलने देते। हमारी फसलों को मिलने वाला पोषण इनको मिल जाता है। इस लिए खरपतवार का प्रबंधन करना चाहिए। 

    रबी फसल 

    रबी की फसल सर्दियों में बोने वाली फसल है। ये फसल नवंबर से मार्च तक बोने वाली फसल है। इस फसल के लिए ठंडी जलवायु की और अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। 

    रबी की फसलें 

    • गेहूँ 
    • जौ 
    • चना 
    • मटर 
    • सरसों  
    • आलू 
    • अलसी 

    रबी की फसलों की खेती करने का तरीका 

    • फसलों का चुनाव: रबी की मुख्य फसलें गेहूँ, चना, सरसों, मटर आदि है। सबसे पहले इन में से फसलों का चुनाव करे की हमें किस की खेती करनी है। 
    • अवशिष्ट नमी: रबी की फसल मानसून की बची हुई नमी पर उगती है। खरीफ की खेती करने के बाद खेतो में जमीन की गहराई में नमी बनी रहती है। इस नमी को बचाने के लिए खेतो का समतलीकरण करना जरुरी है। 
    • पाले से बचाव: जनवरी फरवरी के महीने में पाला पड़ता है। इस लिए खेत के चारों और धुआँ करे या सिंचाई करे। 
    • सिंचाई प्रबंध: ड्रिप या स्प्रिंकलर सिचाई ही अपनाए। यह गेहूँ और सब्जियों के लिए फायदेमंद होता है। 

    जायद फसल 

    जायद फसल गर्मियों की फसल है। यह रबी की कटाई के बाद और खरीफ की से पहले का सीजन है। ये फसले कम समय में तैयार हो जाती है। इन्हे गर्म और शुषक जलवायु की अवश्यकता होती है। 

    जायद की फसलें 

    • तरबूज 
    • खरबूजा 
    • ककड़ी 
    • खीरा 
    • सूरजमुखी
    • लोकी 
    • करेला 
    • भिंडी 

    जायद की फसलों की खेती करने का तरीका 

    • फसलों की चुनाव: सबसे पहले इसकी फसल का चुनाव करे की कोनसी फसल लगानी है। 
    • नमी सरक्षण: मिट्टी में नमी बानी रहना बहुत जरुरी है इस लिए मिट्टी की नमी बनाये रखने के लिए मल्विंग का उपयोग करे। 
    • ड्रिप सिंचाई: ड्रिप सिंचाई का उपयोग करे। क्योकि गर्मियों में पानी की बहुत कमी होती है इस लिए ड्रिप सिंचाई से सीधे पोधो की जड़ो ताकि पानी पहुचाये। 

    सामान्य कृषि टिप्स 

    • अच्छी कृषि करने के लिए मिट्टी की जाँच करवाना बहुत जरूरी है। इस लिए हर 2 साल में मिट्टी की जाँच करवाए। 
    • पोषक तत्वों की कमी के अनुसार ही खाद डाले। 
    • एक ही फसल बार – बार न लगाए। फसल बदल – बदल कर लगानी चाहिए। 
    • रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहने की बजाए मित्र कीटो को बढ़ावा दे जो हानिकारक कीड़ो को खाते है। 
    • खेत का हर 3-4 दिन में निरक्षण करे।    

    अस्वीकरण (Disclaimer)

    khetkisan.com पर दी गई यह जानकारी केवल किसानों की सामान्य सहायता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए साझा की गई है। खेती में पैदावार और फसलों का चुनाव कई बाहरी कारकों पर निर्भर करता है।