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  • गन्ने की पत्तियों पर दिख रही हैं पीली-सफेद धारियां तो न करें नजरअंदाज, फसल में हो सकती है इस जरूरी तत्व की भारी कमी!

    गन्ने की पत्तियों पर दिख रही हैं पीली-सफेद धारियां तो न करें नजरअंदाज, फसल में हो सकती है इस जरूरी तत्व की भारी कमी!

    अगर आप गन्ने की खेती कर रहे है तो आपके लिए ये समय अपनी खड़ी फसल की अच्छे से निगरानी करने की जरूरत है कई बार किसान भाई पोधो की ऊपरी पत्तियों पर ध्यान नहीं देते। लेकिन यदि आपको अपने गन्ने की नई और ऊपरी पत्तियों पर पीले या सफ़ेद रंग की लंबी धारिया दिखाई दे रही है तो इसे नजरअंदाज न करे 

    गन्ने के पौधों में दिखने वाले ये लक्षण असल में इस बात का संकेत हैं कि आपकी मिट्टी में एक बेहद जरूरी पोषक तत्व की भारी कमी हो गई है। जब पौधों को जमीन से सही पोषण नहीं मिलता, तो उनकी पत्तियां अपना प्राकृतिक हरा रंग खोने लगती हैं। khetkisan.com के इस विशेष लेख में हम जानेंगे पत्तियों का रंग बदलने का असली कारण और इसे ठीक करने के सबसे असरदार तरीके।

    पत्तियों का रंग बदलने के पीछे का असली कारण

    गन्ने की नई पत्तियों पर दिखने वाली पीली और सफेद धारियों की सबसे बड़ी वजह मिट्टी में आयरन (Iron – लोहे) तत्व की कमी होना है।

    • क्लोरोफिल की कमी: जब पौधों को पर्याप्त लोहा नहीं मिलता, तो पत्तियों में ‘क्लोरोफिल’ (जिसके कारण पत्तियां हरी रहती हैं) बनना बंद हो जाता है।
    • लक्षण: शुरुआत में नई पत्तियों की नसों के बीच का हिस्सा पीला पड़ता है, जो बाद में पूरी तरह सफेद धारियों में बदल जाता है।
    • किन खेतों में आती है समस्या: यह समस्या ज्यादातर उन इलाकों में देखी जाती है जहाँ की मिट्टी अधिक रेतीली होती है, या फिर जहाँ लंबे समय तक जलभराव (खेत में पानी जमा रहना) की स्थिति बनी रहती है।

    मिट्टी का पीएच (pH Level) भी है एक बड़ी वजह

    खेत में लोहा मौजूद होने के बावजूद कई बार पौधे उसे सोख नहीं पाते। ऐसा तब होता है जब मिट्टी का पीएच लेवल (Alkaline Soil) बहुत ज्यादा होता है।

    • नुकसान: उच्च पीएच स्तर के कारण मिट्टी में मौजूद आयरन लॉक हो जाता है।
    • फसल पर असर: लोहा न मिलने से पौधे अपना भोजन (Photosynthesis) ठीक से नहीं बना पाते। नतीजा यह होता है कि पूरा गन्ना कमजोर होने लगता है, उसकी बढ़वार रुक जाती है और सीजन के अंत में गन्ने में मिठास (सुक्रोज की मात्रा) भी काफी कम हो जाती है।

    गन्ने की फसल से आयरन की कमी दूर करने के तुरंत उपाय

    अपनी गन्ने की फसल को फिर से लहलहाता और चमकदार हरा-भरा बनाने के लिए किसान भाइयों को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

    • फेरस सल्फेट का छिड़काव: खड़ी फसल पर 0.5% से 1% फेरस सल्फेट (Ferrous Sulphate) के घोल का सीधा छिड़काव करें। इसके लिए 5 से 10 ग्राम फेरस सल्फेट को प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे किया जा सकता है।
    • चीलेटेड आयरन का इस्तेमाल: बाजार में मिलने वाला चीलेटेड आयरन (Chelated Iron – Fe-EDTA) इस समस्या के लिए सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है। पत्तियों पर इसका स्प्रे करने से पौधे बहुत तेजी से लोहे को सोख लेते हैं और कुछ ही दिनों में पत्तियों का रंग वापस हरा होने लगता है।

    भविष्य के लिए बुवाई से पहले कर लें ये तैयारी

    अगर आप चाहते हैं कि अगली फसल में यह समस्या दोबारा न आए, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

    • मिट्टी परीक्षण (Soil Testing): अगली बार गन्ने की बुवाई करने से पहले अपने खेत की मिट्टी की जाँच जरूर करवाएं ताकि सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति का पता चल सके।
    • जैविक खाद का प्रयोग: खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट का भरपूर इस्तेमाल करें। जैविक खाद मिट्टी के पीएच स्तर को संतुलित रखती है और पौधों को सभी पोषक तत्व सोखने में मदद करती है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

    Q.1: आयरन की कमी सबसे पहले गन्ने की पुरानी पत्तियों पर दिखती है या नई पत्तियों पर?

    उत्तर: आयरन की कमी के लक्षण हमेशा गन्ने के पौधे की सबसे ऊपरी और नई पत्तियों पर सबसे पहले दिखाई देते हैं, क्योंकि लोहा पौधों के भीतर आसानी से आगे नहीं बढ़ पाता।

    Q.2: क्या यूरिया डालने से गन्ने की पत्तियों का पीलापन दूर हो सकता है?

    उत्तर: यदि पीलापन नाइट्रोजन की कमी से है तो यूरिया काम करेगा, लेकिन अगर पत्तियों पर सफेद-पीली लंबी धारियां हैं (जो आयरन की कमी का लक्षण हैं), तो यूरिया डालने से कोई फायदा नहीं होगा। इसके लिए फेरस सल्फेट का ही स्प्रे करना पड़ेगा।

    Q.3: फेरस सल्फेट का स्प्रे करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?

    उत्तर: स्प्रे हमेशा सुबह के समय या शाम को तेज धूप ढलने के बाद करें। घोल की मात्रा सही रखें, क्योंकि ज्यादा तेज घोल से पत्तियां झुलस सकती हैं।

    Q.4: चीलेटेड आयरन साधारण फेरस सल्फेट से बेहतर क्यों माना जाता है?

    उत्तर: चीलेटेड आयरन को पौधे बहुत आसानी से और तुरंत सोख लेते हैं, और यह मिट्टी या पानी के अन्य तत्वों के साथ मिलकर जल्दी खराब नहीं होता।

    Q.5: क्या खेत में बहुत ज्यादा पानी भरने से भी गन्ने में पीलापन आता है?

    उत्तर: हाँ, लंबे समय तक जलभराव रहने से जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वे मिट्टी से आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्व सोखना बंद कर देती हैं।

    Q.6: एक एकड़ गन्ने की फसल के लिए कितना फेरस सल्फेट पर्याप्त होता है?

    उत्तर: आमतौर पर एक एकड़ के छिड़काव के लिए लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम फेरस सल्फेट को पर्याप्त पानी (लगभग 200 लीटर) में मिलाकर स्प्रे किया जाता है।

    Q.7: गन्ने में लोहे की कमी होने से पैदावार पर कितना असर पड़ सकता है?

    उत्तर: यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो गन्ने की लंबाई और मोटाई घट जाती है, जिससे कुल उत्पादन में 20% से 30% तक की भारी कमी आ सकती है।

    Q.8: क्या चूने वाली या क्षारीय (Alkaline) मिट्टी में यह समस्या ज्यादा आती है?

    उत्तर: हाँ, जिन मिट्टियों में चूने की मात्रा ज्यादा होती है या पीएच 7.5 से अधिक होता है, वहां आयरन डेफिसिएंसी होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

    Q.9: क्या गोबर की खाद डालने से मिट्टी में लोहे की कमी दूर होती है?

    उत्तर: गोबर की खाद में स्वयं भी सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं और यह मिट्टी की संरचना को ऐसा बनाती है जिससे जड़ें जमीन में दबे हुए लोहे को आसानी से ग्रहण कर पाती हैं।

    Disclaimer: khetkisan.com पर दी गई यह जानकारी किसानों की सामान्य जागरूकता और शिक्षा के लिए है। गन्ने की फसल में पत्तियों के पीलेपन के कई अन्य कारण (जैसे बीमारी या अन्य तत्वों की कमी) भी हो सकते हैं। इसलिए खेत में बड़े पैमाने पर किसी भी दवा या खाद का छिड़काव करने से पहले अपने स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के विशेषज्ञों से पौधों का निरीक्षण करवाकर सटीक सलाह जरूर लें। किसी भी प्रकार की फसल बर्बादी या वित्तीय नुकसान के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।