Tag: औषधीय एवं सुगंधित पौधों

  • Aaiye Dekhte Hai Ek Aise Podhe ki Kheti Jiski Bazar me Badhti ja Rahi Hai Mang: इस खेती को करके आप भी कमा सकते है मोटा पैसा 

    Aaiye Dekhte Hai Ek Aise Podhe ki Kheti Jiski Bazar me Badhti ja Rahi Hai Mang: इस खेती को करके आप भी कमा सकते है मोटा पैसा 

    औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती: आज हम हमारी इस पोस्ट में आपको औषधीय और सुगंधित पोधो की खेती के बारे में बतायेगे। जैसा की हम हमारी रोजाना ज़िन्दगी में देख रहे है की हमारी ज़िन्दगी में हर्बल पदार्थों की कीमत कितनी बढ़ गयी। क्योकि अब स्किन से बालों और बाकि शरीर से सम्बंधित बहुत सी परेशानी आती रहती है। ऐसे में हर्बल पदार्थ हमारी बहुत सहायता करते है। इसीलिए बाजार में इन पदार्थो की मांग बढ़ती जा रही है। क्योकि सभी शैम्पू, फेसवाश, बॉडी लोशन इत्यादि हर्बल पदार्थो से ही बने होते है। उदहारण के लिए : जैसे Aloe Veera हमारी स्किन के लिए बहुत लाभदायक है और जितना ये हमारी स्किन के लिए लाभदायक है उतना ही ये हमारे बालों के लिए भी लाभदायक है इस लिए इसकी खेती करने में भी हम लाखो रुपया कमा सकते है। और हर्बल पदार्थो की खेती करने का एक बड़ा फायदा ये भी है की ये खेती हम काम जगह में भी कर सकते है। 

    औषधीय और सुगन्धित पौधों की खेती करने के फायदे 

    इन पौधों की खेती करने के बहुत से फायदे है। कुछ फायदों के बारे में हम आपको विस्तार से बतायेगे। 

    • कम लागत: औषधीय और सुगन्धित पौधों की की खेती करने में कम लागत आती है। क्योकि इन फसलों में खाद और पानी की कम आवश्यकता होती है। 
    • अधिक मुनाफा: इन फसलों की खेती करने में हमे अधिक मुनाफा होता है। क्योकि इन पदार्थो की बाज़ारी मांग बहुत अधिक है। इस लिए यह खेती अधिक मुनाफा पाने का एक अच्छा जरिया है। 
    • सुरक्षा: जब हम कोई फसल उगाते है तो हमें ये डर रहता है की कभी हमारी फसल को कोई आवारा पशु न खा ले। लेकिन इस फसल की खेती करने में हमें इस बात का भी कोई डर नहीं है क्योकि पशु सुगन्धित पौधों को नहीं खाते।  

    औषधीय और सुगन्धित पौधों के नाम 

    • औषधीय पौधे: अश्वगंधा, तुलसी, कालमेघ, एलोवेरा, सफ़ेद मूसली, सतावरी, स्टीविया। 
    • सुगन्धित पौधे: लेमनग्रास, पामरोजा, खस, सिट्रोनेला, लैवेंडर, गेरानियम। 

    औषधीय और सुगन्धित पौधों की खेती कैसे करे ?

    हर पौधे की खेती करने की अलग – अलग प्रक्रिया होती है। औषधीय और सुगन्धित पौधों की खेती के बारे में चर्चा करेंगे। 

    मिट्टी और जलवायु का चयन: ज्यादातर औषधीय और सुगन्धित पौधों के लिए बुलई दोमट मिट्टी सही रहेगी। जलभराव वाली जमीन इसके लिए उपयुक्त नहीं होती।

    खेत की तैयारी 

    • गर्मी के मौसम में जुताई ज्यादा करनी चाहिए। 
    • आखिरी जुताई में 10 से 15 टन गोबर की खाद डालें प्रति हैक्टैयर। 
    • खेत को समतल करे और जल निकासी का प्रबंध करे।

    बुवाई और रोपाई 

    बीज द्वारा : तुलसी, अश्वगंधा इनके जैसी फसलों की बुवाई जुलाई- अगस्त में की जाती है। 

    दुरी: पौधे से पौधे की दुरी फसल के अनुसार रखे।

    सिंचाई और खाद 

    शुरुआत में पौधो को नमी की जरूरत होती है। ताकि उनकी ग्रोथ अच्छे से हो सके। 

    औषधीय पौधो में रासायनिक उर्वरको का उपयोग कम से कम करना चाहिए। 

    फसल की कटाई 

    सुंगंधित पौधों की साल में 3-4 बार कटाई की जाती है। 

    कटाई के बाद पौधों को सूखा कर या उन से तेल निकालकर उनको बाजार में बेचा जा सकता है।  

    अधिक मुनाफा देने वाली फसलें 

    1. लेमनग्रास: यह एक अधिक मुनाफा देने वाली फसल है। क्योकि इसकी खेती में 5 साल तक कोई खर्च नहीं आता सिर्फ कटाई करनी होती है। और इस से साबुन, तेल और परफ्यूम बनते है जो उद्योगों में बहुत बिकते है। 

    2.अश्वगंधा: इस फसल को होने में 5-6 महीनें लगते है। इसकी जड़े उच्च मूल्य पर बिकती है। 

    3. एलोवेरा: यह एक ऐसी फसल है जो एक बार लगाने के बाद कई सालो तक उपज देता रहता है। 

    4. सफ़ेद मूसली: यह एक जड़ वाली फसल है। यह बहुत महंगी बिकती है।      

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    Q.1: औषधीय पौधों की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है? 

    उत्तर: तुलसी और अश्वगंधा जैसी मुख्य फसलों की बुवाई के लिए जुलाई-अगस्त (मानसून का समय) सबसे उपयुक्त माना जाता है।

    Q.2: क्या इन फसलों को जानवरों से सुरक्षा की आवश्यकता होती है? 

    उत्तर: सुगंधित पौधों का एक बड़ा फायदा यह है कि आवारा पशु इन्हें नहीं खाते, जिससे फसल सुरक्षा का डर कम हो जाता है।

    Q.3: लेमनग्रास की खेती कितने समय तक मुनाफा देती है? 

    उत्तर: लेमनग्रास एक बार लगाने के बाद लगभग 5 साल तक उत्पादन देती है, जिसमें रखरखाव का खर्च बहुत कम आता है।

    Q.4: इन पौधों की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी अच्छी होती है? 

    उत्तर: ज्यादातर औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है, लेकिन ध्यान रहे कि जमीन में जलभराव नहीं होना चाहिए।

    Q.5: क्या औषधीय खेती में रासायनिक खाद का प्रयोग करना चाहिए?

     उत्तर: इन पौधों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम से कम करना चाहिए ताकि उनकी औषधीय गुणवत्ता बनी रहे।

    Q.6: सुगंधित पौधों से कमाई कैसे की जाती है? उत्तर: कटाई के बाद पौधों को सुखाकर या मशीनों द्वारा उनका तेल निकालकर बाजार में बेचा जा सकता है।

    Q.7: सफेद मूसली की खेती महंगी क्यों मानी जाती है? 

    उत्तर: सफेद मूसली एक जड़ वाली फसल है जिसकी बाजार में कीमत बहुत अधिक होती है, इसलिए यह अधिक मुनाफा देने वाली फसल है।

    Q.8: एलोवेरा की खेती के क्या लाभ हैं? 

    उत्तर: एलोवेरा एक बार लगाने के बाद कई सालों तक उपज देता है और इसका उपयोग त्वचा तथा बालों से संबंधित उत्पादों में बहुत अधिक होता है।

    Q.9: खेत की तैयारी के समय कितनी खाद डालनी चाहिए? 

    उत्तर: खेत की आखिरी जुताई के समय प्रति हेक्टेयर लगभग 10 से 15 टन गोबर की खाद डालना फायदेमंद होता है।

    Disclaimer

    khetkisan.com पर दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। औषधीय पौधों की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी की जाँच और बाजार की मांग का आकलन स्वयं करें। किसी भी बड़े निवेश या तकनीकी प्रयोग से पहले कृषि विशेषज्ञों से सलाह अवश्य लें। इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए यह वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।