भारत एक कृषि प्रधान देश है और इस में अनेक फसलों की खेती की जाती है। खेती के मामले में भारत एक प्रचलित देश है। भारत की 60% आबादी खेती पर ही निर्भर है। भारत में 6 तरह के मौसम होते है और इन सभी मौसमो में अलग-अलग तरह की फसल उगाई जाती है। लेकिन कई किसान इन फसलों को उगाते समय कुछ गलतियां करते है जिनकी वजह से उनको फसल की अच्छी पैदावार नहीं मिलती। और उनको अपनी खेती घाटे का सामना करना पड़ता। आज हम हमारे इस लेख में उन गलतियों के बारे में जिक्र करेंगे जो किसान खेती करते समय करते है।
एक ही फसल बार-बार उगाना
यह खेती में की जाने वाली बहुत बड़ी गलती है। क्योकि एक ही फसल बार-बार उगाने की वजह से मिट्टी की उर्वरता खत्म हो जाती है और फिर वह मिट्टी उपजाऊ नहीं रहती। लेकिन कई बार किसान इस बात की और ध्यान नहीं देते और वह बार-बार यही गलती करते रहते है। इसलिए फसलों की अधिक पैदावार पाने के लिए फसलों को बदल-बदलकर लगाना चाहिए। जिससे फसलों को भी फायदा होगा और किसानो को भी।
कीटनाशको का अधिक प्रयोग
कीटनाशको का अधिक प्रयोग भी फसलों को नुकसान पहुँचाता है। कीटनाशको का अधिक प्रयोग मिट्टी के लिए भी हानिकारक होता है। कीटनाशकों की ज्यादा मात्रा से पौधे जल सकते है, पत्तियां पिली पड़कर झड़ सकती है और उनकी वृद्धि भी रुक सकती है। ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल फल, सब्जी और अनाज की पौष्टिकता को कम कर सकता है।
मिट्टी की जाँच किए बिना उर्वरक डालना
यह भी किसानों के द्वारा की गई एक बहुत बड़ी गलती है। क्योंकि मिट्टी की जाँच किए बिना उस में उर्वरक नहीं डालने चाहिए। क्योंकि मिट्टी की जाँच करना बहुत जरूरी है अगर जाँच किए बिना उस में उर्वरक डालने से उत्पादन घट सकता है और फसलों की वृद्धि भी रुक सकती है। क्योंकि यदि मिट्टी में किसी पोषक तत्व की अधिकता है और आप फिर भी वही खाद डालते है तो इससे फसलों को नुकसान की होगा।
किसान नए Modified बीजों का भी प्रयोग नहीं करते है।
नए Modified बीजों का प्रयोग करने के बहुत से फायदे है। ये बीज कृषि में उत्पादकता बढ़ाने का काम करते है और फसलों को बीमारियों से बचाते है। ये अपने भीतर कीटो को मारने वाले प्रोटीन उत्पन्न करते हैं। इन बीजो से फसलों का नुकसान कम होता है और बेहतर उत्पादन देते है।
बाजार से जानकारी न लेकर खेती करना
यदि किसान बाजार से जानकरी लेकर खेती करे तो उनको उनकी फसल का अच्छा मूल्य मिल सकता है। ऐसा करने से उसको पता चल सकता है की बाजार में किस चीज की अधिक माँग है और किस चीज की कम माँग है। अगर किसान को इन सब चीजों का पता चल जाएगा तो वह इस हिसाब से ही खेती कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q.1: फसल चक्र (Crop Rotation) क्यों जरूरी है?
उत्तर: एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल उगाने से मिट्टी के खास पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। फसलों को बदल-बदल कर लगाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीटों का चक्र भी टूटता है।
Q.2: मिट्टी की जाँच (Soil Testing) कब करवानी चाहिए?
उत्तर: फसल की बुआई से कम से कम एक महीना पहले मिट्टी की जाँच करवानी चाहिए। आदर्श रूप से हर 2-3 साल में एक बार खेत की मिट्टी की जाँच जरूर कराएं।
Q.3: कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से फसल पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर: रसायनों के ज्यादा इस्तेमाल से पौधे झुलस सकते हैं और फसल की गुणवत्ता गिर जाती है। साथ ही, यह मिट्टी में मौजूद मित्र कीटों को भी मार देता है।
Q.4: Modified या उन्नत बीजों के क्या फायदे हैं?
उत्तर: ये बीज कम समय में अधिक पैदावार देते हैं और इनमें बीमारियों तथा कीटों से लड़ने की क्षमता साधारण बीजों के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है।
Q.5: बाजार की जानकारी (Market Research) खेती के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर: बाजार की मांग को जानकर खेती करने से किसान को अपनी उपज का सही और बढ़ा हुआ दाम मिलता है। इससे ‘बम्पर पैदावार और कम दाम’ जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
Q.6: क्या जैविक खाद रासायनिक खाद का विकल्प हो सकती है?
उत्तर: हाँ, गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट और हरी खाद का उपयोग मिट्टी की संरचना को सुधारता है और लंबे समय में रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करता है।
Q.7: पौधों में पोषक तत्वों की कमी को कैसे पहचानें?
उत्तर: पत्तियों का पीला पड़ना, पौधों की बढ़वार रुकना या फलों का समय से पहले गिरना पोषक तत्वों की कमी के लक्षण हो सकते हैं। सही जानकारी के लिए मिट्टी परीक्षण ही सबसे सटीक तरीका है।
Q.8: सिंचाई का गलत तरीका फसल को कैसे नुकसान पहुँचाता है?
उत्तर: जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं (Root Rot), जबकि बहुत कम पानी से दाने छोटे रह जाते हैं। ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई आजकल सबसे बेहतर मानी जाती है।
Q.9: नई कृषि तकनीकों की जानकारी किसान कहाँ से ले सकते हैं?
उत्तर: किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), सरकारी कृषि विभाग के पोर्टल या khetkisan.com जैसे विश्वसनीय ब्लॉग से नई जानकारियां ले सकते हैं।
Disclaimer: khetkisan.com पर दी गई यह जानकारी किसानों की सामान्य जागरूकता और शिक्षा के लिए है। खेती के परिणाम मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु परिवर्तन, बीजों के चयन और व्यक्तिगत प्रबंधन पर निर्भर करते हैं। लेख में बताए गए सुझावों को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले अपने स्थानीय कृषि अधिकारियों या विशेषज्ञों से सलाह अवश्य लें। किसी भी प्रकार की फसल बर्बादी या वित्तीय हानि के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।









